
छत्तीसगढ़ के वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की विस्तृत जीवनी पढ़ें। जानें उनके डॉक्टर से लेकर 3 बार मुख्यमंत्री बनने तक का सफर, ‘चाउंर वाले बाबा‘ की उपाधि, मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना, नक्सलवाद पर उनका रुख और वर्तमान राजनीतिक भूमिका (Speaker of Chhattisgarh Assembly)
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डॉ. रमन सिंह का परिचय (Introduction to Dr. Raman Singh)
डॉ. रमन सिंह, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक वरिष्ठ राजनेता हैं, जिनका छत्तीसगढ़ की राजनीति में प्रभाव गहरा और दीर्घकालिक रहा है। उनका राजनीतिक सफर एक साधारण चिकित्सक के रूप में शुरू हुआ, और वह अंततः छत्तीसगढ़ राज्य के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री बने। उनका जन्म 15 अक्टूबर 1952 को कवर्धा, छत्तीसगढ़ (तब मध्य प्रदेश) में हुआ था I अपने 15 वर्षों के मुख्यमंत्री कार्यकाल (2003 से 2018) के दौरान, उन्होंने राज्य के बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ, व्यापक सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचने का प्रयास किया।
उनकी सार्वजनिक छवि एक शिक्षित, सौम्य और मिलनसार व्यक्ति की रही है, जिसने उन्हें राज्य की जनता के बीच अत्यधिक लोकप्रिय बना दिया। उनकी पहचान का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक उनका लोकप्रिय उपनाम ‘चाउंर वाले बाबा‘ (चावल वाले बाबा) है। यह उपाधि उन्हें मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना की सफलता के कारण मिली, जिसके तहत लाखों गरीब परिवारों को रियायती दर पर या मुफ्त चावल उपलब्ध कराया गया। यह उपनाम न केवल एक योजना का परिणाम था, बल्कि यह उनकी राजनीतिक सफलता का आधार बना । इस नाम ने उन्हें शहरी बनाम औद्योगिक विकास की बहसों से परे, सीधे ‘गरीबों के हितैषी‘ के रूप में स्थापित किया। यह उनकी ‘जन-सेवा‘ की भावना को दर्शाता है, जिसकी शुरुआत उन्होंने अपने चिकित्सा पेशे के दौरान ही कर दी थी ।
वर्तमान में, डॉ. रमन सिंह छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक उच्च संवैधानिक पद पर कार्यरत हैं। 19 दिसंबर 2023 को, उन्होंने छत्तीसगढ़ विधानसभा के छठे अध्यक्ष (Speaker) के रूप में पदभार ग्रहण किया। यह पद उन्हें विधायी प्रक्रिया और संवैधानिक संतुलन बनाए रखने की एक महत्वपूर्ण भूमिका प्रदान करता है। उनकी व्यक्तिगत और राजनीतिक प्रोफाइल को सारणी में संक्षेप में प्रस्तुत किया गया है।
डॉ. रमन सिंह: Short में
| विवरण | तथ्य |
| पूरा नाम | डॉ. रमन सिंह |
| जन्म तिथि | 15 अक्टूबर 1952 (73 साल) |
| जन्म स्थान | कवर्धा, छत्तीसगढ़ |
| शिक्षा | बी.ए.एम.एस. (आयुर्वेदिक चिकित्सा) |
| राजनीतिक दल | भारतीय जनता पार्टी |
| पत्नी का नाम | श्रीमती वीणा सिंह |
| संतान | 2 (पुत्र अभिषेक सिंह और पुत्री अस्मिता) |
| सर्वाधिक चर्चित पद | छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री (2003–2018) |
| लोकप्रिय उपनाम | चाउंर वाले बाबा |
| वर्तमान पद | छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष (दिसंबर 2023 से) |
डॉ रमन सिंह का प्रारंभिक जीवन (Early Life of Dr. Raman Singh)
डॉ. रमन सिंह का प्रारंभिक जीवन उनके भावी राजनीतिक करियर की सादगी और सेवाभाव की नींव रखता है। उनका जन्म कवर्धा में एक हिंदू राजपूत परिवार में हुआ था। उनके पिता विघ्रहरन सिंह ठाकुर एक वकील थे, और उनकी माता का नाम सुधा सिंह था ।
कवर्धा में जन्म और शैक्षणिक पृष्ठभूमि
शिक्षा के क्षेत्र में, उन्होंने 1972 में शासकीय विज्ञान महाविद्यालय, बेमेतरा से स्नातक की डिग्री पूरी की । इसके पश्चात, उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में कदम रखा। 1975 में, उन्होंने शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, रायपुर से आयुर्वेदिक चिकित्सा (BAMS) में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। चिकित्सा की यह पृष्ठभूमि ही वह पहला मंच बनी जिसने उन्हें सार्वजनिक सेवा से जोड़ा।
आयुर्वेद में डिग्री पूरी करने के बाद, उन्होंने कवर्धा में ही अपना आयुर्वेदिक चिकित्सा का अभ्यास शुरू किया । इस दौरान उन्होंने अपनी सादगी और खुलेपन के कारण स्थानीय निवासियों के बीच काफी लोकप्रियता अर्जित की। यह उल्लेखनीय है कि उन्होंने कई बार गरीब और जरूरतमंद लोगों का निःशुल्क उपचार भी किया । चिकित्सक के रूप में उनकी यह प्रारंभिक सेवा भावना, बाद में मुख्यमंत्री के रूप में उनकी लोक कल्याणकारी नीतियों (जैसे खाद्यान्न योजना) में स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई, जिसने उनके “जन-सेवक” की छवि को मजबूती प्रदान की।
जनसंघ से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत
डॉ. रमन सिंह के राजनीतिक झुकाव की शुरुआत उनके छात्र जीवन से ही हो गई थी। वह भारतीय जनसंघ की विचारधाराओं और सिद्धांतों से गहराई से प्रभावित थे । इस वैचारिक प्रतिबद्धता ने उन्हें औपचारिक रूप से राजनीति में प्रवेश करने के लिए प्रेरित किया।
1976-77 के दौरान, उन्होंने अपने गृह नगर कवर्धा में भारतीय जनसंघ युवा मोर्चा के अध्यक्ष का पदभार संभाला । यह उनका पहला संगठनात्मक पद था। इसके बाद, उन्होंने स्थानीय राजनीति में कदम रखा। वर्ष 1983-84 में, वह कवर्धा नगरपालिका के शीतला वार्ड से नगरपालिका पार्षद के रूप में निर्वाचित हुए । ये शुरुआती अनुभव उन्हें संगठनात्मक कौशल और स्थानीय प्रशासन की समझ प्रदान करने में सहायक रहे, जिसने भविष्य में उन्हें बड़े राजनीतिक पदों के लिए तैयार किया।
डॉ. रमन सिंह का राष्ट्रीय पटल पर उत्थान (Rise to the National Stage of Dr. Raman Singh): मध्य प्रदेश से केंद्रीय मंत्री तक (1990-2003)
छत्तीसगढ़ राज्य के गठन से पहले, डॉ. रमन सिंह ने अपनी राजनीतिक यात्रा अविभाजित मध्य प्रदेश की विधान सभा और राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय मंत्री के रूप में आगे बढ़ाई।
मध्य प्रदेश विधानसभा में अनुभव
1990 में, डॉ. रमन सिंह ने कवर्धा सीट से चुनाव लड़कर तत्कालीन मध्य प्रदेश विधान सभा में विधायक के रूप में प्रवेश किया । इसके बाद, 1993 में उन्हें इसी सीट से फिर से निर्वाचित किया गया । विधायक के रूप में अपने कार्यकाल (1993-98) के दौरान, उन्होंने प्रशासनिक और विधायी कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) के सदस्य के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया, और साथ ही विधान सभा की पत्रिका विधायिनी के संपादन में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
हालांकि, 1998 में उन्हें कवर्धा विधान सभा सीट से हार का सामना करना पड़ा । यह असफलता उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा अवसर दिलाए जाने से पहले एक क्षणिक ठहराव साबित हुई।
लोकसभा में प्रवेश और वाजपेयी कैबिनेट में भूमिका
1999 के लोकसभा चुनावों में, डॉ. रमन सिंह ने अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। उन्होंने राजनांदगांव संसदीय क्षेत्र से जीत हासिल की और 13वीं लोकसभा के सदस्य चुने गए । इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता मोतीलाल वोरा को पराजित किया, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर उनकी प्रतिभा को स्थापित किया ।
उनकी संगठनात्मक क्षमता और लोकप्रियता को पहचानते हुए, तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें अपने केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया। उन्होंने 13 अक्टूबर 1999 से 29 जनवरी 2003 तक वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया।
एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब 2003 में उन्हें केंद्र में मंत्री पद छोड़कर छत्तीसगढ़ राज्य की राजनीति में वापस लौटने के लिए कहा गया। उन्हें छत्तीसगढ़ में भाजपा के राज्य पार्टी प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसका लक्ष्य आगामी राज्य चुनावों की तैयारी करना था । केंद्रीय मंत्री के पद से राज्य प्रमुख की जिम्मेदारी लेना दर्शाता है कि केंद्रीय नेतृत्व छत्तीसगढ़ को जीतने के लिए उनकी सरल, स्थानीय छवि और जमीनी जुड़ाव पर भरोसा कर रहा था। यह एक रणनीतिक निर्णय था, जिसे डॉ. सिंह ने “अभूतपूर्व सफलता” के साथ पूरा किया । उनके प्रमुख राजनीतिक पदों का कालक्रम निचे दिया गया है।
डॉ. रमन सिंह के प्रमुख राजनीतिक पद (कालक्रम)
| पद | संस्थान/राज्य | कार्यकाल/वर्ष |
| नगरपालिका पार्षद | कवर्धा (शीतला वार्ड) | 1983-84 |
| विधायक (दो कार्यकाल) | मध्य प्रदेश विधान सभा (कवर्धा) | 1990, 1993-98 |
| लोकसभा सदस्य | 13वीं लोकसभा (राजनांदगांव) | 1999-2003 |
| केंद्रीय राज्य मंत्री (वाणिज्य एवं उद्योग) | भारत सरकार | 13 अक्टूबर 1999 – 29 जनवरी 2003 |
| मुख्यमंत्री (लगातार तीन कार्यकाल) | छत्तीसगढ़ | 7 दिसंबर 2003 – 17 दिसंबर 2018 |
| राष्ट्रीय उपाध्यक्ष | भारतीय जनता पार्टी | 2019 – 2023 |
| विधानसभा अध्यक्ष | छत्तीसगढ़ विधान सभा | 19 दिसंबर 2023 – वर्तमान |
डॉ. रमन सिंह का छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में 15 वर्ष का ‘स्वर्ण युग’ (2003-2018) (Golden Era as a Chief Minister of Dr. Raman Singh)
दिसंबर 2003 में, डॉ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ के दूसरे मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, और उन्होंने अगले 15 वर्षों तक इस पद पर कार्य किया, जो छत्तीसगढ़ के इतिहास में किसी भी नेता का सबसे लंबा कार्यकाल है ।
लगातार चुनावी विजयों का सिलसिला
डॉ. रमन सिंह ने 2003, 2008 और 2013 के विधानसभा चुनावों में लगातार तीन बार भारतीय जनता पार्टी को जीत दिलाई । उनकी चुनावी यात्रा में कई महत्वपूर्ण पड़ाव रहे: 2004 में, उन्होंने डोंगरगांव सीट से उपचुनाव जीता। इसके बाद, 2008 और 2013 दोनों चुनावों में, उन्होंने राजनांदगांव सीट से विधायक के रूप में जीत हासिल की और मुख्यमंत्री पद संभाला । 2013 में, उन्होंने अपनी तीसरी लगातार जीत हासिल की, जो भाजपा के लिए एक बड़ी सफलता थी। इस दौरान, उन्होंने जुलाई 2016 तक, भाजपा के किसी भी मुख्यमंत्री के सबसे लंबे कार्यकाल (1230 दिन) का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया था ।
उनके शासनकाल के प्रमुख स्तंभों में बुनियादी ढांचे का व्यापक विकास, औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देना और वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) का मुकाबला करने के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय लागू करना शामिल था । उनका शासन मॉडल समावेशी विकास और कल्याण पर केंद्रित था, जिसने उन्हें व्यापक सम्मान दिलाया।
ई-गवर्नेंस और प्रौद्योगिकी पहल (CHOICE)
डॉ. रमन सिंह ने आधुनिक प्रशासन और पारदर्शिता के लिए प्रौद्योगिकी का सक्रिय रूप से उपयोग किया। छत्तीसगढ़ इंफोटेक और बायोटेक सोसायटी (CHIPS) की अध्यक्षता करते हुए, उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दिया । उनके प्रमुख प्रोजेक्ट में CHOICE (Chhattisgarh On-line Information for Citizens Empowerment) शामिल था, जिसके तहत राज्य के नागरिकों को सभी सेवाएं ऑनलाइन प्रदान करने के लिए ई-गवर्नेंस विकसित किया गया ।
प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से नागरिकों की उन्नति के लिए, छत्तीसगढ़ राज्य को 2007 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) का प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिला । यह उपलब्धि उनके प्रशासनिक दृष्टिकोण को रेखांकित करती है, जो केवल कल्याण पर नहीं, बल्कि आधुनिकता और जवाबदेही पर भी केंद्रित था।
डॉ. रमन सिंह की तीन बार की चुनावी सफलता केवल ‘चावल’ बांटने पर आधारित नहीं थी, बल्कि यह एक संतुलित विकास मॉडल की सफलता को दर्शाती थी। उन्होंने एक ओर जन कल्याण पर ध्यान केंद्रित किया, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक विकास को भी प्राथमिकता दी। उदाहरण के लिए, 2006 में छत्तीसगढ़ ने केंद्रीय उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आईईएम (औद्योगिक उद्यमिता ज्ञापन) में शीर्ष स्थान प्राप्त किया, जिसने उसी वर्ष ₹1,07,899 करोड़ का निवेश आकर्षित किया । यह रणनीति शहरी और मध्यम वर्ग को आर्थिक प्रगति और आधुनिक प्रशासन का आश्वासन देते हुए ग्रामीण मतदाताओं को स्थिर कल्याणकारी योजनाएं प्रदान करने में सफल रही, जो लगातार तीन बार की जीत का आधार बनी।
डॉ. रमन सिंह की जनकल्याणकारी नीतियां (Public Welfare Policies of Dr. Raman Singh)
डॉ. रमन सिंह की राजनीतिक विरासत का सबसे महत्वपूर्ण और स्थायी हिस्सा उनकी व्यापक सामाजिक कल्याण योजनाएं हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से ‘रमन मॉडल‘ के रूप में जाना जाता है।
मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना (चावल योजना)
यह योजना उनके शासनकाल की आधारशिला थी और उनकी सार्वजनिक छवि का पर्याय बन गई। छत्तीसगढ़ खाद्य और पोषण सुरक्षा अधिनियम के तहत लागू की गई इस योजना का उद्देश्य राज्य के लाखों गरीब परिवारों को आवश्यक पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना था । इस पहल के तहत, गरीबों को रियायती दर पर (या कई मामलों में मुफ्त) चावल उपलब्ध कराया गया।
डॉ. सिंह स्वयं मानते हैं कि इस योजना का गहरा प्रभाव पड़ा और इसने छत्तीसगढ़ में स्थिति को बदल दिया, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि कोई भी गरीब व्यक्ति भूखा न सोए । इस योजना के तहत पोषण सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए, अनुसूचित और माड़ा क्षेत्रों के सभी अंत्योदय और प्राथमिकता वाले राशनकार्ड धारकों को ₹5 प्रति किलो की दर से 2 किलो चना प्रति परिवार प्रदान करने की योजना भी 2013 से लागू की गई। यह व्यापक कवरेज और लाभ ही उन्हें ‘चाउंर वाले बाबा’ के उपनाम से अमर कर गया।
आदिवासी और महिला कल्याण पहल
सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए, उनकी सरकार ने कई लक्षित योजनाएं शुरू कीं:
- चरण पादुका योजना: यह योजना विशेष रूप से तेंदूपत्ता संग्राहकों (आदिवासियों) के लिए शुरू की गई थी। इसके तहत, गरीब आदिवासियों को मुफ्त जूते और चप्पल दिए जाते थे। यह योजना 2008 में शुरू हुई, और शुरुआत में केवल पुरुषों को लाभ मिलता था, लेकिन बाद में 2008 में महिलाओं को भी इसमें शामिल किया गया । इस योजना को बाद में आई कांग्रेस सरकार ने बंद कर दिया था, लेकिन इसकी राजनीतिक और सामाजिक प्रासंगिकता को देखते हुए, वर्तमान भाजपा सरकार (सीएम विष्णु देव साय) ने इसे फिर से शुरू करने की घोषणा की है ।
- सरस्वती साइकिल योजना: यह योजना 2004 में शुरू की गई थी। इसका प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में छात्राओं के बीच स्कूल छोड़ने की दर (ड्रॉपआउट रेट) को कम करना और उन्हें अपनी बुनियादी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के लिए प्रोत्साहित करना था । इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत, 9वीं कक्षा में अध्ययनरत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और बीपीएल परिवारों की बालिकाओं को निःशुल्क साइकिलें प्रदान की गईं, जिससे उनकी शिक्षा की राह आसान हुई ।
इसके अतिरिक्त, डॉ. सिंह वर्तमान में भी स्थानीय विकास कार्यों में सक्रिय हैं। विधानसभा अध्यक्ष बनने के बावजूद, उन्होंने राजनांदगांव जिले के किसानों के लिए ₹242.80 करोड़ की लमती फीडर डैम परियोजना जैसी सिंचाई पहल को स्वीकृति दिलाने में महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। इस परियोजना से 41 गांवों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होगा, जिसमें 10 सूखाग्रस्त गांव भी शामिल हैं ।
मुख्यमंत्री कार्यकाल की मुख्य जनकल्याणकारी योजनाएं
| योजना | फोकस क्षेत्र | मुख्य प्रभाव/उद्देश्य |
| मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना | खाद्य सुरक्षा | ‘चाउंर वाले बाबा’ छवि, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना |
| चरण पादुका योजना | वनवासी/आदिवासी कल्याण | तेंदूपत्ता संग्राहकों को मुफ्त जूते/चप्पल प्रदान करना |
| सरस्वती साइकिल योजना (2004) | शिक्षा/महिला सशक्तिकरण | ग्रामीण बालिकाओं की स्कूल छोड़ने की दर कम करना |
| CHOICE (ई-गवर्नेंस) | प्रशासनिक पारदर्शिता | नागरिकों को ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करना, 2007 UNDP पुरस्कार विजेता |
डॉ. रमन सिंह द्वारा आंतरिक सुरक्षा और नक्सलवाद का मुकाबला (Internal Security and Combating Naxalism by Dr. Raman Singh )
डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल का एक महत्वपूर्ण और जटिल पहलू राज्य में वामपंथी उग्रवाद, यानी नक्सलवाद का मुकाबला करना था। उनके नेतृत्व में, सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए विकास और सुरक्षा उपायों के संयोजन का उपयोग किया।
सलवा जुडूम का समर्थन और कानूनी हस्तक्षेप
आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए, रमन सिंह सरकार ने 2006 में सलवा जुडूम नामक नागरिक मिलिशिया (सिविलियन मिलिशिया) को एक तरह से सहयोग और वित्तीय सहायता प्रदान की । सलवा जुडूम को राज्य में नक्सलवादियों का मुकाबला करने के लिए संगठित किया गया था। इस कदम ने डॉ. सिंह के कार्यकाल को एक “कठोर” (Tough) नेता के रूप में स्थापित किया, जो बलपूर्वक आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने के पक्षधर थे ।
हालांकि, इस संगठन पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगे, जिसके कारण यह अत्यधिक विवादास्पद रहा। अंततः, 2011 में, सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने एक फैसले से इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया । सलवा जुडूम के समर्थन की यह रणनीति बल प्रयोग पर त्वरित निर्भरता को दर्शाती है, भले ही यह कानूनी रूप से टिकाऊ साबित नहीं हुई।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास का एजेंडा
सलवा जुडूम के बंद होने के बाद, सरकार ने नक्सलवाद को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाया, जिसमें विकास को मुख्यधारा में लाना शामिल था। डॉ. सिंह ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों, बिजली और संचार बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया, क्योंकि यह समझा गया था कि नक्सलवाद गरीबी और कनेक्टिविटी की कमी के कारण पनपता है । उनके कार्यकाल में, कई जिलों से नक्सलवादियों को बाहर निकाला गया । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके कार्यकाल के दौरान दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण सड़कों, बिजली, पाइपलाइन से पानी और मोबाइल टावरों के पहुंचने के प्रयासों की सराहना की थी ।
यह दृष्टिकोण स्पष्ट करता है कि रमन सिंह का प्रशासन अंततः इस निष्कर्ष पर पहुंचा था कि दीर्घकालिक समाधान केवल बल प्रयोग से नहीं, बल्कि गरीबी और कनेक्टिविटी की कमी को दूर करने से ही संभव है। उन्होंने युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों पर भी ध्यान केंद्रित किया। वर्तमान में, विधानसभा अध्यक्ष के रूप में, वह स्वामी विवेकानंद युवा प्रोत्साहन योजना के तहत नियद नेलानार जैसी योजनाओं से जुड़े सुकमा के दूरदराज के गांवों के युवाओं को विधानसभा का दौरा करने में सुविधा प्रदान कर रहे हैं, ताकि वे विकास और शांति की रोशनी फैला सकें ।
डॉ. रमन सिंह की चुनौतियाँ और विवाद (Challenges and Controversies of Dr. Raman Singh) : शासन पर लगे आरोप
लगातार 15 वर्षों तक शासन करने के दौरान, डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल को विभिन्न राजनीतिक और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
प्रारंभिक कार्यकाल के विवाद
उनके शुरुआती मुख्यमंत्रित्व काल में ही उन्हें कई विवादों में विरोधियों द्वारा घेरा गया। वर्ष 2004 में, उन्हें पुष्प स्टील विवाद और बालको जमीन घोटाले में फंसाने की कोशिश की गई थी। हालांकि, मामला कोर्ट तक भी गया, लेकिन डॉ. सिंह इन दोनों ही कानूनी मामलों में खुद को बचाने में कामयाब रहे । इन आरोपों के बावजूद, उनकी विनम्रता और सौम्य स्वभाव (सार्वजनिक छवि) ने इन राजनीतिक विवादों के प्रभाव को व्यापक जनमानस पर कम करने में मदद की ।
चिट फंड घोटाला और 2018 चुनाव पर प्रभाव
उनके शासनकाल के अंतिम चरण और बाद में एक बड़ा विवाद सामने आया, जब उनके बेटे अभिषेक सिंह (पूर्व सांसद) पर आरोप लगे। 2019 में, अभिषेक सिंह और 19 अन्य के खिलाफ छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में कथित चिट फंड घोटाले में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया । यह आरोप था कि कंपनी ने निवेशकों को कुछ ही महीनों में पैसा दोगुना करने का आश्वासन दिया, लेकिन 2016 में कंपनी बंद हो गई, जिससे निवेशकों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ। हालांकि, अभिषेक सिंह ने कंपनी से किसी भी संबंध से इनकार किया था ।
इन आरोपों और 15 साल की स्वाभाविक सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इनकम्बेंसी) के अलावा, 2018 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार का एक मुख्य कारण किसानों का असंतोष था। किसान लगातार फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, जिसका जबरदस्त नुकसान पार्टी को उठाना पड़ा ।
यह स्थिति उनकी विरासत में एक विरोधाभास को दर्शाती है: उन्होंने मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना के माध्यम से गरीबों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में सफलता प्राप्त की, लेकिन वह कृषि क्षेत्र में मौजूद गहरे संरचनात्मक संकट (जैसे ऋण और फसल मूल्य) को संबोधित करने में विफल रहे । इस व्यापक आर्थिक संकट ने उनके सामाजिक कल्याण की सफलताओं पर पानी फेर दिया और 2018 में उनकी सत्ता का अंत हुआ।
डॉ. रमन सिंह की वर्तमान संवैधानिक भूमिका (Current Status of Dr. Raman Singh): विधानसभा अध्यक्ष (Speaker)
2018 में चुनावी हार के बाद भी, डॉ. रमन सिंह राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में प्रासंगिक बने रहे। हार के बाद, उन्होंने 2019 से 2023 तक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में संगठन के लिए कार्य किया, जो पार्टी के भीतर उनके उच्च कद को दर्शाता है ।
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और वापसी
संगठनात्मक भूमिका निभाने के बाद, दिसंबर 2023 में भाजपा को छत्तीसगढ़ में फिर से सत्ता मिली। पार्टी ने डॉ. रमन सिंह को एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक पद छत्तीसगढ़ विधानसभा के छठे अध्यक्ष (Speaker) के लिए नामित किया। वह सर्वसम्मति से इस पद पर चुने गए ।
इस पद को ग्रहण करने से पहले, उन्होंने राजनीतिक तटस्थता और संवैधानिक मर्यादा बनाए रखने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर त्यागपत्र प्रस्तुत किया । सत्ता खोने के बावजूद, उन्हें तुरंत विधानसभा अध्यक्ष जैसा उच्च संवैधानिक पद मिलना यह स्थापित करता है कि केंद्रीय नेतृत्व को उनके अनुभव, परिपक्वता और राजनीतिक कद पर अटूट विश्वास है। यह उन्हें राज्य की राजनीति में एक प्रभावशाली लेकिन तटस्थ भूमिका में बनाए रखता है।
विधायी प्रक्रिया में योगदान
विधानसभा अध्यक्ष के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी पर, डॉ. रमन सिंह ने 90 विधायकों के संरक्षक के रूप में अपनी भूमिका पर जोर दिया है । उन्होंने कहा है कि उनका प्रयास रहेगा कि विधानसभा का संचालन बेहतर ढंग से हो और प्रदेश के हित के सभी मुद्दे विधानसभा के पटल पर उठाए जाएं ।
एक अनुभवी राजनेता और पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में, वह विधायी प्रक्रिया में अनुशासन और गंभीरता को महत्वपूर्ण मानते हैं। उनका दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित है कि सदन में विचार-विमर्श प्रभावी और सार्थक हो। यह पद उन्हें विधायी निगरानी और संवैधानिक संतुलन बनाए रखने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपता है, जो राज्य के भविष्य की राजनीति में उनके अप्रत्यक्ष लेकिन गहरा प्रभाव को सुनिश्चित करता है।
निष्कर्ष
डॉ. रमन सिंह का राजनीतिक सफर छत्तीसगढ़ के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। एक साधारण आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में शुरू हुई उनकी यात्रा उन्हें 3 बार राज्य के मुख्यमंत्री पद तक ले गई, जहां उन्होंने 15 वर्षों तक शासन किया। उनकी राजनीतिक विरासत जनकल्याणकारी योजनाओं और एक आक्रामक विकासवादी मॉडल के संयोजन पर आधारित है, जिसका प्रतीक ‘चाउंर वाले बाबा‘ का उनका उपनाम है। मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना और ई-गवर्नेंस पहल (CHOICE) ने उनके शासन को लाखों लोगों के जीवन से सीधे जोड़ा।
हालांकि उन्हें 2018 में किसानों के असंतोष और सत्ता विरोधी लहर के कारण सत्ता गंवानी पड़ी, लेकिन उनकी प्रशासनिक विशेषज्ञता, सादगी और दीर्घकालिक नेतृत्व का रिकॉर्ड उन्हें छत्तीसगढ़ की राजनीति का एक अनिवार्य स्तंभ बनाए रखता है। वर्तमान में, छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका यह सुनिश्चित करती है कि वह राज्य के विधायी और संवैधानिक ढांचे को मजबूती प्रदान करते रहें। उनका अनुभव उन्हें एक मार्गदर्शक और संरक्षक के रूप में स्थापित करता है, जो छत्तीसगढ़ के राजनीतिक भविष्य पर स्थायी प्रभाव डालना जारी रखेंगे।
References :
- छ.ग. विधानसभा वेबसाइट – https://cgvidhansabha.gov.in/hindi_new/bio/speaker_current.htm
- OneIndia.com – https://www.oneindia.com/politicians/dr-raman-singh-59189.html
- छ.ग. जनसंपर्क : https://dprcg.gov.in/
डॉ. रमन सिंह से संबंधित सामान्य प्रश्न (FAQs)
1. डॉ. रमन सिंह को ‘चाउंर वाले बाबा’ क्यों कहा जाता है?
उन्हें यह लोकप्रिय उपनाम उनकी सबसे सफल पहल ‘मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना‘ के कारण मिला । इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ के लाखों गरीब परिवारों को अत्यंत रियायती दरों पर या मुफ्त में चावल उपलब्ध कराया गया। छत्तीसगढ़ी भाषा में ‘चाउंर‘ का अर्थ ‘चावल‘ होता है, और यह उपनाम उनकी लोक कल्याणकारी छवि का प्रतीक बन गया।
2. डॉ. रमन सिंह वर्तमान में किस पद पर कार्यरत हैं?
डॉ. रमन सिंह वर्तमान में (दिसंबर 2023 से) छत्तीसगढ़ विधान सभा के छठे अध्यक्ष (Speaker) के रूप में कार्यरत हैं। इस पद को ग्रहण करने से पहले, उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था ।
3. मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. रमन सिंह का कार्यकाल कितना लंबा था?
डॉ. रमन सिंह ने 7 दिसंबर 2003 से 17 दिसंबर 2018 तक लगातार तीन कार्यकालों के लिए, यानी कुल 15 वर्षों के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। वह छत्तीसगढ़ के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर रहने वाले नेता हैं ।
4. सरस्वती साइकिल योजना क्या है और कब शुरू हुई?
सरस्वती साइकिल योजना वर्ष 2004 में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई थी । इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं के बीच स्कूल छोड़ने की दर को कम करना था। इसके तहत, 9वीं कक्षा की अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और बीपीएल परिवारों की छात्राओं को निःशुल्क साइकिलें प्रदान की जाती थीं ।
5. सलवा जुडूम क्या था और इसमें डॉ. रमन सिंह की क्या भूमिका थी?
सलवा जुडूम छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा समर्थित एक नागरिक मिलिशिया (Citizen Militia) थी, जिसे राज्य में नक्सलवाद का मुकाबला करने के लिए 2006 में गठित किया गया था । रमन सिंह सरकार ने इस पहल का समर्थन किया और इसे वित्तीय सहायता दी, हालांकि मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों के कारण 2011 में सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया था ।










