
भूपेश बघेल भारतीय राजनीति के उन प्रमुख चेहरों में से एक हैं, जिन्होंने न केवल छत्तीसगढ़ राज्य की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी संगठनात्मक क्षमता का लोहा मनवाया। किसान-केंद्रित कल्याणकारी योजनाओं और मुखर राजनीतिक शैली के लिए पहचाने जाने वाले बघेल ने दिसंबर 2018 से दिसंबर 2023 तक छत्तीसगढ़ के तीसरे मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। उनकी यात्रा अविभाजित मध्य प्रदेश के एक किसान परिवार से शुरू हुई और आज वह कांग्रेस पार्टी के शीर्ष रणनीतिकारों में शामिल हैं।
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भूपेश बघेल का प्रारंभिक जीवन और किसान पुत्र की विरासत
भूपेश बघेल का जन्म 23 अगस्त, 1961 को अविभाजित मध्य प्रदेश के दुर्ग जिले में हुआ था । वह नंद कुमार बघेल और बिंदेश्वरी बघेल के पुत्र हैं । उनके पिता का मुख्य व्यवसाय कृषि था और उनकी मां एक गृहिणी थीं। ग्रामीण और कृषक पृष्ठभूमि से आने के कारण, बघेल को बचपन से ही कठिन परिश्रम करने और सही निर्णय लेने का साहस अपने पिता से विरासत में मिला । बघेल कुर्मी समुदाय से संबंध रखते हैं, और छत्तीसगढ़ में वह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदायों के बीच कांग्रेस पार्टी के एक प्रमुख प्रतिनिधि माने जाते हैं ।
बघेल की राजनीतिक पहचान का आधार उनकी यही ‘किसान पुत्र‘ की विरासत है। उनकी किसान-केंद्रित नीतियां और बाद में लाई गई कल्याणकारी योजनाएं—जैसे किसान कर्ज माफी और राजीव गांधी किसान न्याय योजना—उनके पारिवारिक पृष्ठभूमि से उनके गहरे जुड़ाव को सीधे तौर पर दर्शाती हैं । यह पृष्ठभूमि उन्हें राज्य की ग्रामीण राजनीति में एक मजबूत क्षेत्रीय आधार प्रदान करती है। बचपन में, उन्हें प्यार से ‘बबलू दाऊ‘ के नाम से भी जाना जाता था, जो उनके सरल और ग्रामीण जड़ों से जुड़े व्यक्तित्व को दर्शाता है ।
भूपेश बघेल: संक्षिप्त विवरण (Biodata)
| श्रेणी | विवरण |
| जन्म तिथि | 23 अगस्त, 1961 (Age 64) |
| जन्म स्थान | दुर्ग, मध्य प्रदेश (अब छत्तीसगढ़) |
| राजनीतिक दल | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस |
| समुदाय | कुर्मी (अन्य पिछड़ा वर्ग – OBC) |
| शिक्षा | एम.ए. (प्रीवियस), कानून की डिग्री |
| जीवन संगी | मुक्तेश्वरी बघेल |
| बच्चे | 1 बेटा और 3 बेटियाँ (कुल 4) |
| मुख्यमंत्रित्व काल | 17 दिसंबर 2018 – 3 दिसंबर 2023 |
| वर्तमान पद | AICC महासचिव; पंजाब प्रभारी (2025 से) |
भूपेश बघेल की शिक्षा और निजी जीवन
भूपेश बघेल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दुर्ग में गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल मरार पाटन जिला दुर्ग से पूरी की । कुछ संदर्भों से पता चलता है कि उनके गाँव में स्कूल न होने के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए 30 किलोमीटर दूर रहना पड़ा था । शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने रायपुर के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की (According to IndiaCSR)। (कुछ सूत्रों के अनुसार गवर्नमेंट दिग्विजय स्वशासी कॉलेज राजनंदगांव से ग्रेजुएशन पूरी की I) उन्होंने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर से एम.ए. (प्रीवियस) की डिग्री भी प्राप्त की । कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने दुर्ग में वकालत का अभ्यास शुरू किया।
उनका विवाह मुक्तेश्वरी बघेल से हुआ, और इस दंपत्ति के चार बच्चे हैं—एक बेटा और तीन बेटियां । भूपेश बघेल का विवाह उन्हें राज्य के व्यापक सामाजिक और बौद्धिक हलकों से जोड़ता है। उनकी पत्नी मुक्तेश्वरी बघेल प्रसिद्ध हिंदी लेखक डॉ. नरेंद्र देव वर्मा की बेटी और आध्यात्मिक नेता स्वामी आत्मानंद की भतीजी हैं । बघेल वर्तमान में छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी समाज के संरक्षक (Guardian) के रूप में भी कार्य करते हैं, जिससे छत्तीसगढ़ के प्रमुख कृषक समुदाय के साथ उनका सामाजिक जुड़ाव मजबूत होता है ।
भूपेश बघेल का राजनीतिक उदय और शुरुआती करियर (1980s – 2013)
भारतीय युवा कांग्रेस से आरंभिक कदम
भूपेश बघेल ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के माध्यम से की । वह जल्द ही अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के सदस्य बन गए, और उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव तथा कार्यक्रम समन्वयक जैसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों पर भी कार्य किया ।
उनका प्राथमिक चुनाव क्षेत्र पाटन विधानसभा रहा, जो दुर्ग जिले में स्थित है। उन्होंने 1993 में पाटन विधानसभा सीट से अपना पहला चुनाव लड़ा और जीता, इसके बाद 2002 में उन्होंने इसी सीट से एक बार फिर जीत दर्ज की ।
अविभाजित मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मंत्री पद
मध्य प्रदेश के विभाजन से पहले, भूपेश बघेल को मध्य प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री (मुख्यमंत्री से संबंधित लोक शिकायत निवारण, स्वतंत्र प्रभार) के रूप में प्रशासनिक अनुभव प्राप्त हुआ ।
नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद, भूपेश बघेल नवगठित राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे। वह छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदस्य बने और उन्हें राजस्व, पुनर्वास, राहत कार्य, और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों का मंत्री बनाया गया । राजस्व और लोक स्वास्थ्य जैसे प्रमुख विभागों को संभालने का उनका प्रारंभिक प्रशासनिक अनुभव उन्हें एक संगठनात्मक व्यक्ति के साथ-साथ एक अनुभवी प्रशासक के रूप में स्थापित करता है।
चुनावी संघर्ष और विपक्षी नेतृत्व
भूपेश बघेल के करियर में कुछ संघर्ष के दौर भी आए। उन्होंने 2008 के विधानसभा चुनाव में पाटन सीट गँवा दी । इसके अतिरिक्त, उन्होंने 2009 में रायपुर लोकसभा सीट से संसदीय चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा । इन चुनावी असफलताओं से यह स्पष्ट होता है कि उनकी राजनीतिक शक्ति का केंद्र हमेशा उनके क्षेत्रीय गढ़ (पाटन/दुर्ग) में अधिक था, न कि शहरी या राष्ट्रीय स्तर पर।
हालांकि, इन पराजयों के बावजूद, वह पार्टी के भीतर सक्रिय रहे। 2003 से 2008 के बीच, उन्होंने छत्तीसगढ़ कांग्रेस विधायक दल के उपनेता के रूप में भी कार्य किया, जिससे उन्हें विपक्ष के नेता के रूप में महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त हुआ ।
भूपेश बघेल का कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के रूप में निर्णायक नेतृत्व (2014-2018)
झीरम घाटी त्रासदी के बाद संगठनात्मक पुनरुत्थान
भूपेश बघेल के राजनीतिक जीवन में सबसे निर्णायक मोड़ 2013 की झीरम घाटी नक्सली त्रासदी के बाद आया। इस बर्बर हमले में कांग्रेस के शीर्ष राज्य नेताओं की हत्या कर दी गई थी, जिससे राज्य इकाई में एक बड़ा नेतृत्व शून्य पैदा हो गया । इस संकट के बीच, भूपेश बघेल ने अक्टूबर 2014 में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का पद संभाला और जून 2019 तक इस पद पर रहे ।
इस त्रासदी को बघेल ने संगठनात्मक अवसर में बदल दिया। उन्होंने अत्यंत आक्रामक और संघर्षशील विपक्षी राजनीति अपनाई। उन्होंने पार्टी को एकजुट करने पर ध्यान केंद्रित किया और भाजपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के खिलाफ एक मजबूत और विश्वसनीय चेहरा बनकर उभरे।
आंतरिक संघर्ष और जोगी गुट का अलगाव
संगठन प्रमुख के रूप में, बघेल ने आंतरिक विरोधियों को किनारे करने में भी दृढ़ता दिखाई। अंतगढ़ विधानसभा उपचुनाव ऑडियो टेप विवाद के बाद, उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी को राज्य कांग्रेस से सफलतापूर्वक अलग कर दिया । इस कठोर संगठनात्मक रणनीति ने राज्य कांग्रेस में अनुशासन और नेतृत्व को केंद्रीकृत करने में मदद की। इस प्रक्रिया ने बघेल को केवल ‘किसान नेता‘ से ऊपर उठाकर एक कठोर संगठनात्मक रणनीतिकार के रूप में स्थापित किया।
2018 के विधानसभा चुनावों में अभूतपूर्व जीत
बघेल के नेतृत्व में, छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने 2018 के विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने 90 में से 68 सीटों पर बहुमत हासिल किया, जो एक ऐतिहासिक जनादेश था । इस जीत का श्रेय मुख्य रूप से उनके किसान-केंद्रित चुनावी एजेंडे और ‘कर्ज माफी‘ जैसे लोकलुभावन वादों को दिया गया । इस जीत के बाद, 17 दिसंबर 2018 को, भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
भूपेश बघेल का शासन मॉडल : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री (2018-2023)
मुख्यमंत्री के रूप में भूपेश बघेल का शासनकाल ‘न्याय योजनाओं‘ और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार पर केंद्रित रहा। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पहचान ‘धान के कटोरे‘ और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मॉडल के रूप में मजबूत करने का प्रयास किया।
किसान हितैषी एजेंडा और वित्तीय हस्तांतरण
पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद, उन्होंने अपने सबसे बड़े चुनावी वादे को पूरा करते हुए, प्रदेश के किसानों का ₹9,270 करोड़ का अल्पकालिक कृषि ऋण माफ किया। इस निर्णय से 18.82 लाख किसानों को लाभ पहुंचा ।
राजीव गांधी किसान न्याय योजना (RGKNY): यह योजना उनके शासन का आधार स्तंभ थी। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत, सरकार खरीफ फसलों (मुख्य रूप से धान) के उत्पादकों को इनपुट सब्सिडी प्रदान करती थी। खरीफ फसलों के लिए किसानों को प्रतिवर्ष ₹9,000 प्रति एकड़ की दर से इनपुट सब्सिडी दी गई । धान के बदले अन्य फसल या वृक्षारोपण करने वाले किसानों को ₹10,000 प्रति एकड़ की उच्च दर से सब्सिडी दी जाती थी, जो वृक्षारोपण के लिए तीन साल तक जारी रहती थी ।
यह मॉडल प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) पर अत्यधिक निर्भर था। बीते तीन वर्षों में राज्य के लगभग 22 लाख किसानों को ₹12,920 करोड़ से अधिक की इनपुट सब्सिडी सीधे उनके बैंक खातों में भेजी गई, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक मांग बढ़ी । उदाहरण के लिए, 2021 के लिए, 26.21 लाख किसानों के बैंक खातों में इनपुट सब्सिडी की दूसरी किस्त के रूप में ₹1,745 करोड़ हस्तांतरित किए गए थे ।
गोधन न्याय योजना और ‘गौठान’ मॉडल
भूपेश बघेल सरकार ने 2020 में हरेली के त्योहार पर ‘गोधन न्याय योजना‘ की शुरुआत की । यह अपनी तरह की देश की पहली योजना थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना और जैविक खेती को प्रोत्साहित करना था।
इस योजना के तहत, सरकार पशुपालकों से ₹2 प्रति किलोग्राम की दर से गोबर की खरीद करती थी। खरीदे गए गोबर का उपयोग वर्मी कंपोस्ट (जैविक खाद) तैयार करने के लिए किया जाता था। इस योजना को राज्य भर में 5,000 से अधिक गौठानों के माध्यम से लागू किया गया । महिला स्व-सहायता समूह इन गौठानों पर वर्मी कंपोस्ट बनाने और अन्य आय-उन्मुख गतिविधियाँ चलाने में शामिल थे।
इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी NITI Aayog की गवर्निंग काउंसिल की बैठक के दौरान गोधन योजना की प्रशंसा की, जिसके बाद झारखंड, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसी सरकारों ने भी ग्रामीण आर्थिक सुधार के लिए छत्तीसगढ़ के मॉडल का अनुसरण किया । यह दर्शाता है कि बघेल का शासन मॉडल सिर्फ स्थानीय सफलता नहीं था, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर पर अनुकरणीय नीति थी।
‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ की अवधारणा और सामाजिक न्याय
बघेल सरकार ने सामाजिक न्याय के मोर्चे पर भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए:
- भूमिहीनों के लिए न्याय: राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के तहत, लगभग 10 लाख ग्रामीण भूमिहीन मजदूरों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की वित्तीय सहायता देने का निर्णय लिया गया, जिससे उन्हें सीधे आर्थिक राहत मिली ।
- आदिवासी अधिकार: सरकार ने बस्तर जिले के लोहंडीगुड़ा के किसानों की वह जमीन लौटाई, जिसे इस्पात संयंत्र के लिए अधिग्रहित किया गया था, जो आदिवासी समुदायों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है ।
- आर्थिक प्रदर्शन: राज्य में विभिन्न न्याय योजनाओं, जैसे गोधन, राजीव किसान न्याय योजना, और सरकारी अंग्रेजी मीडियम स्कूल योजना के माध्यम से लोगों के खातों में ऑनलाइन भुगतान के कारण, छत्तीसगढ़ ने पिछले एक साल से देश भर के राज्यों में सबसे कम बेरोजगारी दर दर्ज की । 2022 के एक सर्वे में दावा किया गया था कि जनता को खुश रखने के मामले में बघेल देश में पहले पायदान पर थे ।
भूपेश बघेल सरकार की प्रमुख न्याय योजनाएँ एवं लाभार्थी आंकड़े (2018-2023)
| योजना का नाम | उद्देश्य | मुख्य प्रावधान | प्रमुख आंकड़े/लाभार्थी |
| किसान कर्ज माफी योजना (2018) | किसानों को तत्काल वित्तीय राहत | अल्पकालिक कृषि ऋण की माफी | लगभग 18.82 लाख किसान; ₹9,270 करोड़ की माफी |
| राजीव गांधी किसान न्याय योजना (RGKNY) | कृषि इनपुट सब्सिडी प्रदान करना | खरीफ फसलों के लिए ₹9,000-₹10,000 प्रति एकड़ | लगभग 22-24 लाख किसान; 2020-22 तक ₹12,920 करोड़ वितरित |
| गोधन न्याय योजना | ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जैविक खेती को प्रोत्साहन | ₹2 प्रति किलोग्राम की दर से गोबर की खरीद | 5,000 से अधिक गौठान; महिला समूहों द्वारा वर्मी कंपोस्ट निर्माण |
| ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना | भूमिहीन मजदूरों को वित्तीय सहायता | प्रतिवर्ष ₹6,000 की राशि | लगभग 10 लाख ग्रामीण भूमिहीन मजदूर लक्षित |
2023 के चुनाव परिणाम और सत्ता से बाहर (Post-2023 Analysis)
कांग्रेस की हार: अति आत्मविश्वास और एंटी-इनकम्बेंसी का दबाव
2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा। बघेल और उनकी पार्टी 65-70 सीटें जीतने का दावा कर रहे थे, लेकिन भाजपा बहुमत के आंकड़े को पार कर गई ।
राजनीतिक विश्लेषण के अनुसार, इस हार के कई कारक थे। बघेल का अति आत्मविश्वास एक प्रमुख कारण बताया गया । 2022 में ही एक सर्वे ने दावा किया था कि देश में सबसे अधिक सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इनकम्बेंसी) छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के खिलाफ थी ।
हार का एक महत्वपूर्ण कारण यह भी था कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना जैसी मजबूत कल्याणकारी योजनाओं के आर्थिक लाभ के बावजूद, भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों ने उनके लोकप्रिय ‘न्याय‘ मॉडल के सकारात्मक प्रभाव को बेअसर कर दिया। यह स्थिति दर्शाती है कि केवल आर्थिक लाभ या कल्याणकारी योजनाएं ही सत्ता वापसी की गारंटी नहीं दे सकतीं, खासकर जब कानूनी विवादों का सामना करना पड़ रहा हो।
सत्ता परिवर्तन
3 दिसंबर 2023 को चुनावी नतीजे आने के बाद, भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया। उनके बाद भारतीय जनता पार्टी के विष्णु देव साय ने 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री का पद संभाला । बघेल ने पाटन विधानसभा सीट पर अपनी जीत बरकरार रखी , हालांकि बाद में उन्होंने 2024 में राजनांदगांव लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा जिसमें उन्हें हार मिली ।
भूपेश बघेल पर कानूनी विवाद और वर्तमान राजनीतिक भूमिका
छत्तीसगढ़ में सत्ता खोने के बाद भूपेश बघेल का राजनीतिक सफर कानूनी और संगठनात्मक चुनौतियों के एक नए चरण में प्रवेश कर गया।
महादेव सट्टा ऐप घोटाला (Mahadev Betting App Scam)
भूपेश बघेल का नाम महादेव सट्टेबाजी ऐप घोटाले से जुड़े मामलों में सामने आया। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में दर्ज FIR में भूपेश बघेल को 19 नामजद आरोपियों में से एक (आरोपी संख्या 6) के रूप में नामित किया है ।
यह FIR छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज की गई थी, जिसे बाद में राज्य सरकार के रेफरेंस पर सीबीआई को सौंपा गया । ईओडब्ल्यू की यह एफआईआर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट पर आधारित थी। ईडी का आरोप है कि दुबई स्थित प्रमोटरों (सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल, शुभम सोनी) द्वारा संचालित महादेव ऑनलाइन बुक हर महीने ₹450 करोड़ तक की सट्टेबाजी आय उत्पन्न कर रहा था, और बघेल कथित रूप से इस घोटाले के लाभार्थियों में से एक थे ।
मार्च 2025 में, सीबीआई ने इस मामले में बघेल के रायपुर और भिलाई स्थित आवासों पर भी तलाशी ली । बघेल इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते रहे हैं और उन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हैं ।
शराब घोटाला मामला और पारिवारिक जांच
महादेव सट्टा ऐप के अलावा, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की भी जांच की । ईडी का आरोप है कि राजनेताओं, आबकारी अधिकारियों और निजी ऑपरेटरों ने 2019 और 2022 के बीच राज्य के शराब व्यापार में हेरफेर किया, जिसका अनुमानित मूल्य ₹2,000 करोड़ से ₹3,200 करोड़ के बीच बताया गया है ।
इस मामले में, भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को ईडी ने गिरफ्तार किया था। उन पर अपराध की आय को फर्जी कंपनियों और रियल एस्टेट निवेश के माध्यम से वैध बनाने का आरोप है । चैतन्य बघेल ने ईडी द्वारा अपनी गिरफ्तारी और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रमुख प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है । भूपेश बघेल ने अपने बेटे की गिरफ्तारी को भी राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताया है ।
कांग्रेस संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका (वर्तमान पद)
छत्तीसगढ़ में सत्ता खोने और कानूनी विवादों का सामना करने के बावजूद, कांग्रेस पार्टी ने भूपेश बघेल को राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) का महासचिव नियुक्त किया गया है ।
इसके अतिरिक्त, फरवरी 2025 से प्रभावी, उन्हें पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का प्रभारी भी बनाया गया है । बघेल को यह राष्ट्रीय संगठनात्मक भूमिका सौंपना दर्शाता है कि कांग्रेस आलाकमान उनकी मजबूत संगठनात्मक क्षमता में विश्वास रखता है, जिसे उन्होंने 2018 में छत्तीसगढ़ की प्रचंड जीत के माध्यम से साबित किया था । इस राष्ट्रीय पदोन्नति को राजनीतिक हलकों में कानूनी दबाव का सामना कर रहे एक प्रमुख क्षेत्रीय नेता को ‘राजनीतिक सुरक्षा कवच‘ प्रदान करने के रूप में भी देखा जाता है।
निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ की राजनीति पर भूपेश बघेल की विरासत
भूपेश बघेल की राजनीतिक विरासत एक द्वंद्व में निहित है। एक ओर, उन्हें ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़‘ की अवधारणा के तहत किसान-केंद्रित और ग्रामीण-उन्मुख कल्याणकारी मॉडल (राजीव गांधी किसान न्याय योजना और गोधन न्याय योजना) को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए जाना जाता है, जिसने लाखों किसानों और भूमिहीन मजदूरों को सीधे लाभ पहुंचाया । दूसरी ओर, उनके शासनकाल का अंत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों, विशेष रूप से महादेव सट्टा ऐप और शराब घोटाले के मामलों से चिह्नित हुआ, जिसने 2023 में उनकी चुनावी हार में निर्णायक भूमिका निभाई ।
छत्तीसगढ़ में सत्ता गँवाने के बावजूद, AICC महासचिव और पंजाब प्रभारी के रूप में उनकी वर्तमान राष्ट्रीय भूमिका यह सुनिश्चित करती है कि उनका राजनीतिक प्रभाव बरकरार है । बघेल की भविष्य की राजनीतिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह चल रहे कानूनी मामलों का सामना कैसे करते हैं और कांग्रेस पार्टी के भीतर एक राष्ट्रीय रणनीतिकार के रूप में अपनी नई संगठनात्मक भूमिका को कितनी कुशलता से निभाते हैं। वह भारतीय राजनीति में ऐसे नेता के रूप में जाने जाते रहेंगे, जिसने क्षेत्रीय पहचान, संगठनात्मक दृढ़ता और प्रभावी कल्याणकारी योजनाओं का मिश्रण करके एक दशक तक कांग्रेस के लिए छत्तीसगढ़ में एक मजबूत गढ़ बनाए रखा।
Refenrences :
- https://en.wikipedia.org/wiki/Bhupesh_Baghel
- https://indiacsr.in/bhupesh-baghel-chief-minister-of-chhattisgarh/
- https://www.theceo.in/leaders/bhupesh-baghel
- https://www.abplive.com/states/chhattisgarh/know-the-childhood-stories-of-chhattisgarh-cm-bhupesh-baghel-on-his-birthday-ann-2198627
भूपेश बघेल से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs about Bhupesh Baghel)
Q1. भूपेश बघेल कौन हैं?
A: भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख राजनेता और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के वरिष्ठ नेता हैं। उन्होंने 2018 से 2023 तक छत्तीसगढ़ के तीसरे मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और वर्तमान में सक्रिय राजनीतिक भूमिका निभा रहे हैं।
Q2. भूपेश बघेल का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
A: भूपेश बघेल का जन्म 23 अगस्त 1961 को पाटन, जिला दुर्ग (छत्तीसगढ़) में हुआ था। वे एक किसान परिवार से आते हैं और ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े हैं।
Q3. भूपेश बघेल की शिक्षा क्या है?
A: उन्होंने B.Sc. (स्नातक) की डिग्री पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर से प्राप्त की है। शिक्षा के बाद वे सामाजिक और राजनीतिक कार्यों में सक्रिय हो गए।
Q4. भूपेश बघेल कब मुख्यमंत्री बने थे?
A: भूपेश बघेल ने 17 दिसंबर 2018 को छत्तीसगढ़ के तीसरे मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उन्होंने राज्य में किसान, ग्रामीण और संस्कृति आधारित शासन मॉडल को बढ़ावा दिया।
Q5. भूपेश बघेल की प्रमुख योजनाएँ कौन सी हैं?
A:
गोधन न्याय योजना
राजीव गांधी किसान न्याय योजना
मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान
नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी योजना
छत्तीसगढ़ी संस्कृति संरक्षण मिशन
इन योजनाओं ने राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों को सशक्त बनाया।
Q6. भूपेश बघेल को “किसानों का नेता” क्यों कहा जाता है?
A: क्योंकि उनके कार्यकाल में किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए कई योजनाएँ शुरू की गईं, जैसे – धान बोनस योजना, राजीव गांधी किसान न्याय योजना आदि। उन्होंने खेती-किसानी को छत्तीसगढ़ की आर्थिक रीढ़ माना।
Q7. भूपेश बघेल किस राजनीतिक पार्टी से जुड़े हैं?
A: भूपेश बघेल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress) पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। वे 2014 से छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।










